मनोज भावुक Manoj Bhawuk

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अक्टूबर 6, 2006

Filed under: Uncategorized — manojbhawuk @ 11:39 पूर्वाह्न

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लंदन के भोजपुरी कवि- मनोज भावुक
                                                प्रस्तुति- शशि सिंह, मुम्बई
        भोजपुरी के  युवा पीढ़ी  में मनोज भावुक एगो चर्चित नाम बा। भोजपुरी साहित्य, सिनेमा,रंगमंच ,भोजपुरी इंटरनेट  आ देश-विदेश मे भोजपुरी के प्रचार-प्रसार ……..  कहीं भी नज़र डालीं, मनोज भावुक कवनो ना कवनो रूप मे सक्रिय आ सार्थक प्रयास करत मिलिहें। पटना प्रवास के दौरान ( सन ई0 – 1993-2000) बिहार आर्ट थियेटर ,कालिदास रंगालय से जुड़ के भोजपुरी नाटकन के मंचन के अइसन अभियान चलवलें कि उहाँ भोजपुरी नाट्य महोत्सव होखे लागल । बाद मे रेडिओ आ दूरदर्शन से   जुड़लें। दूरदर्शन के पहिला भोजपुरी धारावाहिक ‘साँची पिरितिया’ मे अभिनय के बाद ऊ पटना के फिल्मकार आ निर्माता लोग के भोजपुरी धारावाहिक आ टेलीफिल्म बनावे खातिर कुरेदल शुरु कइलें। ओह घरी कइ गो भोजपुरी सिरियल बनल ,जवना मे ‘तहरे से घर बसाएब ‘ के कथा,पटकथा,संवाद आ गीत लेखन मनोज भावुक के रहे।  ‘जिनिगी के राह’ खातिर भी उ गीत लिखले । लेखन के साथ-साथ उ अभिनय से भी जुड़लें । बिहार आर्ट थियेटर के द्विवर्षीय नाट्य कला डिप्लोमा के टापर ( TOPPER) भावुक के रंगमंच के क्षेत्र मे उनका विशिष्ट योगदान खातिर ‘ बिहार कलाश्री पुरस्कार ‘ आ ‘ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार ‘ से सम्मानित कइल गइल ।   पटना प्रवास के दौरान ही भावुक अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन से जुड़ले  आ बाद मे सम्मेलन के प्रबन्ध मंत्री नियुक्त भइलें। साहित्यिक लेखन के शुरुआत भइल कविता आ गीत से । बाद मे कहानी, भोजपुरी नाटक आ फिल्म के इतिहास लेखन के ओर उन्मुख हो गइलें। भोजपुरी नाटक के इतिहास पर उनकर सारगर्भित लेख ‘भोजपुरी नाटक के संसार ‘ भोजपुरी अकादमी पत्रिका ,पटना जइसन स्तरीय पत्रिका मे प्रकाशित बा। विश्व भोजपुरी रंगमंच के पत्रिका ‘विभोर’ के हरेक अंक मे भावुक के रंगमंचीय लेख  पढ़ल जा सकेला। कवनो-कवनो अंक मे त उनकर तीन-तीन गो लेख बा।

 भावुक जवन सबसे महत्वपूर्ण आ ऐतिहासिक काम कइले बाड़न , जवना खातिर उनका के सम्मानित करे के चाहीं , उ बा- ‘ भोजपुरी सिनेमा के इतिहास लेखन आ देश-विदेश मे भोजपुरी के प्रचार-प्रसार  ।’

    जवना घरी भोजपुरी सिनेमा के बाज़ार लगभग उड़स गइल रहे ,भावुक भोजपुरी सिनेमा मे व्यापक संभावना व्यक्त कइलें। 14 जनवरी 2001,पटना के आई.आई.वी.एम सभागार मे ‘गंगा किनारे मोरा गाँव’ आ ‘धरती मइया’ के निर्माता अशोक चन्द जैन के अध्यक्षता मे भावुक ‘ भोजपुरी सिनेमा के संभावना ‘ पर सारगर्भित आलेख-पाठ कइलन। ई पहिला अवसर रहे जब फिल्मकार आ सहित्यकार लोग कवनो कार्यक्रम मे एक साथे शिरकत कइले रहे लोग।   ………… मुम्बई अइला के बाद ( वर्ष 2002) भावुक सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ,सुजीत कुमार, राकेश पान्डेय, कुणाल सिंह , निर्माता मोहन जी प्रसाद, अभिनेता रवि किसन सरीखे दर्जनो स्टार लोग से भेंट – मुलाकात आ भोजपुरी सिनेमा के सन्दर्भ मे बात-चीत कइलें, जवन भोजपुरी के स्तरीय पत्र-पत्रिकन मे प्रकाशित भइल ।  आज भोजपुरी सिनेमा के बाज़ार गरम बा त एह सिनेमा पर लिखे वाला लोग आ एकरा से जुड़े वाला लोग मुसरी के लेड़ी लेखा बिया गइल बा।जेकरा भोजपुरी से कवनो नाता-गोता नइखे उहो भोजपुरिये क्षेत्र मे आपन बहिनउरा बतावता। भावुक के पैनी नज़र त ओह समय से भोजपुरी फिल्म के संभावना पर प्रकाश डालत आ रहल बा,जवना समय मे भोजपुरी सिनेमा बनल लगभग बन्द हो गइल रहे आ भोजपुरी के बड़े-बड़े महारथी लोग भी कहे कि अब भोजपुरी सिनेमा के कवनो भविष्य नइखे लउकत। आज भावुक के शोध-पुस्तक ‘ भोजपुरी सिनेमा के विकास-यात्रा’ मे लगभग 250 भोजपुरी फिल्म , दर्जनो सिरियल आ टेलीफिल्म के लेखा-जोखा बा। गीत-संगीत ,कथा-पटकथा,अभिनय-तकनीकी के परख-पड़ताल बा। ई आसान काम नइखे। दुर्लभ सामग्री के जुटावल , स्टार लोग से मिलल आ बात-चीत कइल, ….. आ फेर सब के समीक्षा-विवेचना कइल । उहो ओह आदमी खातिर जेकरा रोज़ी-रोटी के स्रोत कुछ और बा। मनोज भावुक पेशा से इंजिनियर बाड़न। वर्तमान मे इंग्लैण्ड के एगो मिनरल वाटर के कम्पनी मे प्लांट मैनेजर बाड़न। एकरा पहिले युगाण्डा के एगो नामी कम्पनी मे प्लांट इंजिनियर रहलें। अपना अतिव्यस्त दिनचर्या के बावजूद भावुक एतना श्रमसाध्य आ समयसाध्य ऐतिहासिक काम के अंजाम देले बाड़न , एह खातिर उनका के रेखांकित,उल्लेखित आ  सम्मानित करे के चाहीं।     भावुक के दूसरा महत्वपूर्ण आ ऐतिहासिक काम बा- देश-विदेश मे भोजपुरी के प्रचार-प्रसार । पूर्वी अफ्रिका के युगाण्डा जइसन देश जहाँ कि भोजपुरियन के संख्या ‘ना’ के बराबर बा। भावुक कोना-कोना, गली-कूचा से भोजपुरियन के खोज-खोज के उहाँ भोजपुरी एसोसिएशन  आफ युगाण्डा के स्थापना क देलन (21 August 2005)। पहिला बार 2005 में युगाण्डा में ‘पुआ पकाल, ठेकुआ बनल आ छठ-पूजा भइल। दीयरी जरल आ भोजपुरिया एक-दोसरा के गला मिलले ।              भावुक युगाण्डा से लंदन( यू.के.) आ गइले ।इहाँ भी 20 August 2006  के हाइड पार्क, लंदन मे भोजपुरियन के एगो गेट-टूगेदर भइल आ पहिला बार भोजपुरिया एगो छत के नीचे इकठ्ठा भइले आ एक-दोसरा से मिलले । भावुक के लंदन अइला मात्र सात-आठ महिना भइल होई , लेकिन उनका सक्रियता आ लोकप्रियता के आलम ई बा कि लंदन से लेके बर्मिंघम तक शायदे कवनो अइसन साहित्यिक- सांस्क्रृतिक कार्यक्रम होई जवना मे भावुक के सादर आमंत्रित ना कइल जात होई। लंदन आ बर्मिंघम के कवि-गोष्ठियन मे भावुक भोजपुरी के तरफ से शिरकत करेलें आ उहाँ भोजपुरी कवि के रूप मे उनकर सशक्त पहचान बन चुकल बा। इंग्लैण्ड के एकमात्र हिन्दी पत्रिका ‘ पुरवाई’ मे भावुक के भोजपुरी रचनन के चाव से छापल जाला। वेबदुनिया आ अभिव्यक्ति-अनुभुति जइसन नामी वेबमैगजीन मे भावुक के भोजपुरी रचनन के हिन्दी अनुवाद छपेला।

हाल ही मे भारतीय भाषा परिषद से सम्मानित होके भावुक जब कोलकाता से लंदन वापस गइलन त BBC,LONDON उनका के सादर आमंत्रित कइलस। भोजपुरी साहित्य आ सिनेमा पर BBC भावुक से बातचीत  (Interview) कइलस। ओह साक्षात्कार मे BBC के माध्यम से भावुक भारत सरकार से ई निहोरा कइले कि अब जेतना जल्दी हो सके भोजपुरी के आठवीं अनुसुची मे शामिल कर लिहल जाय।

भावुक के बचपन रेणुकूट,उत्तर प्रदेश मे बीतल बा। बाबूजी श्री रामदेव सिंह (मजदूर नेता)  हिण्डालको कंपनी मे रहनी। स्कूलिंग के दौरान हिण्डालको मैनेजमेंट भावुक के भाषण आ वाद-विवाद प्रतियोगिता मे भाग लेबे खातिर पिलानी, सारनाथ, दिल्ली, आगरा आदि कई जगे भेजलस । ओही समय से भावुक के लिखे के चस्का लागल – सबसे पहिले यात्रा-संस्मरण । आजकल भावुक अफ्रिका आ यूरोप के यात्रा-संस्मरण – ‘ बादलों को चीरते हुए ‘ लिख रहल बाड़न ।

भावुक छोटे उमिर मे बहुत काम कइले बाड़न । भोजपुरी सिनेमा के इतिहास ( शोध-पत्र), भोजपुरी नाटक के इतिहास ( शोध-पत्र), भउजी के गाँव ( कहानी-संग्रह), आ रेत के झील ( गजल-संग्रह) इनका अप्रकाशित किताबन के नाम ह।

जिनिगी रोज़ सवाल ( कविता,दोहा,गीत- संग्रह) प्रेस मे बा।

भावुक कई गो पत्र-पत्रिकन के सहयोगी संपादक आ विदेशी चेहरा बाड़न।भोजपुरी के इंटरनेटी दुनिया मे मनोज भावुक एगो मशहूर नाम बा।भोजपुरी के पहिला online webmagzine ( www.bhojpatra.net) के प्रधान संपादक बाड़न भावुक । भावुक के व्यक्तित्व आ कृतित्व पर कइ गो समाचार पत्र मे आलेख छप चुकल बा।

एही साल 7,8,9 अप्रैल 2006, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के सातवाँ अधिवेशन ठाणे, मुंबई मे संपन्न भइल । ओह अधिवेशन मे श्री मनोज भावुक के विश्व भोजपुरी सम्मेलन के इंग्लैण्ड इकाई ( ग्रेट ब्रिटेन इकाई)के  राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कइल गइल । सुने मे आवता कि विश्व भोजपुरी सम्मेलन अब एह युवा कवि के अपना पत्रिका ‘समकालीन भोजपुरी साहित्य’ के विदेशी संपादक  बनावे जा रहल बा।    

मनोज भावुक भोजपुरी के लगभग सब पत्र-पत्रिकन के एगो अनिवार्य लेखक त बड़ले बाड़न ,हिन्दी के भी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकन मे इनका भोजपुरी रचनन के स्वागत होला। इनका भोजपुरी गजल-संग्रह ‘तस्वीर ज़िन्दगी के’ के बारे मे का कहे के बा, जब ओकरा ऊपर भारतीय भाषा परिषद जइसन   राष्ट्रीय  स्तर के साहित्यिक संस्था के मुहर लाग गइल बा। ( एही किताब खातिर श्री भावुक के भारतीय भाषा परिषद सम्मान मिलल) । एह से एतना त स्पष्ट बा कि भावुक के भोजपुरी गजलन के गूंज ना सिर्फ व्यापक भोजपुरी जगत मे बा बल्कि हिन्दी जगत मे भी इनका संग्रह के पढ़ल ,गुनल आ सराहल जा रहल बा, जवना के संभावना कविवर माहेश्वर तिवारी जी बहुत पहिलही व्यक्त कइले रहीं।

भारतीय भाषा परिषद श्री भावुक के जवन प्रशस्ति पत्र देहलस ओह मे साफ लिखल बा कि

 ” भारतीय भाषा परिषद श्री मनोज भावुक को न केवल भोजपुरी साहित्य हेतु बल्कि वृहत्तर अर्थ मे पूरे हिन्दी साहित्य और भारत के साहित्य को समृध्द करने हेतु वर्ष 2006 के ‘ युवा पुरस्कार ‘से सम्मानित करते हुए गौरवांवित है। ”

” Bharatiya Bhasha Parishad  feels honoured by recognising Sri Manoj Bhawuk not only for the glorious development of Bhojpuri Literature but also Indian Literature.” 

अब त ई जगजाहिर बा कि 15 सितम्बर 2005 के मनोज भावुक के ई महत्वपूर्ण सम्मान सिनेहस्ती श्री गुलजार आ ठुमरी साम्राज्ञी श्रीमती गिरिजा देवी के हाथे प्रदान कइल गइल ।

भावुक के जनम सीवान जिला के कौसड़ गाँव में 2 जनवरी 1976 के भइल । हाल ही में प्रभात खबर, कोलकाता से बातचीत (18 सितम्बर 2006) में भावुक कहले कि ” पहिले घर मे दीया बार के मन्दिर में दीया जरावे के चाही । ना त घर मे दलिद्दर घुस जाला।” ई कहे के जरुरत ना होखे के चाहीं कि भावुक जवन कहेलें तवन करेलें । भावुक आपन पहिला रचना अपना गाँव के बायोग्राफी ( कौसड़ का दर्पण ) लिखलें। पहिले घर में दीया बरलें आ आज अफ्रिका आ इंग्लैण्ड में रहला के बावजूदों- भोजपुरी,भोजपुरी,भोजपुरी। एकरा के कहल जाला माटी के सपूत आ मातृभाषा से प्रेम । डा0 रमाशंकर श्रीवास्तव जी ठीके कहले बानी ” विदेश में रहि के भी भावुक दू चीज आज तकले ना भूल पवलें ।आपन माई आ भोजपुरी ।” 

भोजपुरी-हिन्दी हास्य-व्यंग्य के महान साहित्यकार  डा0 रमाशंकर श्रीवास्तव जी  भावुक के रचना कर्म पर टिप्पणी करत कहले बानी ”मनोज भावुक   बेहतर इंसान के खोजे मे आपन समय-श्रम लगवले बाड़े । कमे उमिर मे काम बड़के कइले बाड़े। बचपन के खेल मे हम कवनो साथी के मुँह से सुनले

रहनी- ‘छोटकी लुत्ती छटकल जाव,संउसे बनारस लूटत जाव ।’  ‘भावुक’ छोटे उमिर मे लुत्ती बनके साहित्य जगत के बनारस लूट लेले बाड़े। एकरा से साबित होत बा कि प्रतिभा के चमके के कवनो उमिर ना होला।”( पूर्वाकुर ,अप्रैल-जून 2006) ।

ठीक इहे बात गुलजार साहब भावुक के सम्मान देहला के बाद कहनी – ”प्रतिभा की कोई उम्र नही होती” , जवन ओह दिन (15 सितम्बर2006) कोलकाता के अधिकांश अखबार के हेडलाइन बनल।  manch-par-sri-guljar-aur-srimati-girija-devi-ke-sath-manoj-bhawuk.JPG

दोसरा दिने 16 सितम्बर 2006, श्री गुलजार के अध्यक्षता मे हिन्दी कवियन के साथ भावुक के भोजपुरी काव्य-पाठ भइल। भावुक सभागार मे छा गइलें आ पूरा वातावरण भोजपुरीमय हो गइल। ई हम ना 17 सितम्बर के भोरे-भोरे कोलकाता के अखबार बोललस । गुलजार जी मुक्त कंठ से भावुक के प्रशंसा कइनी।

भोजपुरी के एह युवा कवि के हमार बधाई आ शुभकामना ।

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4 Responses to “”

  1. Ankit Says:

    priya bhawuk ji,

    eh blog pe parichay jaani ke neek lagal, aur raur ka vishay mein neek khabar behad prerna pahuchawal baate. Bhojpuri ke vikaas mein ee yogdaan sarahaniya baate.

    ee blog mein likhal devnagari lipi aakarshit rahal jaun maanas mein ago sawaal de gail. kauna vidhi se devnagari mein type kiyal jaa sake la? raur agar ye baat roshani daal sake ta humra ke protsahan mile sakela.

    pratikshit,
    Ankit

  2. manojbhawuk Says:

    Ram ram
    mai shivendrasingh U.P. se.
    maine aapka tashveer jindgi ke padha aapki rachna ne bhojpuri ko naya tashveer diya hai aab to net per bhi bhojpuri samgri mil jati hai.
    Aapne, Dr. o.p. singh ne apne bal pe bhojpuri ka alakh jaga rakha hai to bhojpuri mit nahi sakti.
    mai aapko badhai deta hoon aur ummid kerta hoon ki aap ke dwara bhojpori samridh hogi.
    namashkar
    Shivendra Pratap singh “Basantpuria”

  3. Hi Manoj Ji, I am realy very proud that we are having pearl of Bhojpuri like you who is spreding the light of almost lost cultural language, Bhojpuri.

  4. bipin bahaar Says:

    Manoj Bhai ram ram
    bahut achchha kaila ee blog par kulh jankari uplabdh karake.bahut badhiya
    BIPIN BAHAAR


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