| भोजपुरी रतन मनोज भावुक | |
![]() |
|
|
कुछ लोग के इ भरम बा कि मनोज भावुक के प्रसिद्धि सिर्फ इंटरनेट के चलते बा। बाकिर ओह सतही ज्ञान वाला लोग के इ नइखे मालूम कि नेट पर भोजपुरी के अइला मात्र 4-5 साल होता़, जबकि मनोज भावुक नेट पर भोजपुरी के आवे के बहुत पहिले भोजपुरी के एगो स्थापित साहित्यकार बन चुकल रहलें। पीछला डेढ दशक में भोजपुरी के कवनो अइसन पत्र-पत्रिका ना होई जवना मे भावुक के रचना ना छपल होई। साहित्य के हरेक विधा मे स्तरीय आ सारगभित रचना करे वाला, साथ ही फ़िल्म अउर थियेटर पर भी लगातार कलम चलावे वाला आ देश-विदेश में भोजपुरी के प्रचार-प्रसार करे वाला एह युवा साहित्यकार के पहिला किताब’ तस्वीर जिंदगी के’ (ग़ज़ल-संग्रह) 2004 में प्रकाशित हो चुकल रहे, जवना के 2006 में राष्ट्रीय पुरस्कार (भारतीय भाषा परिषद सम्मान) से नवाजल गइल। ई पुरस्कार पहिला बार कवनो भोजपुरी साहित्यकार के मिलल रहे। अंजोरिया डाट काम पर ई किताब छपल त अंजोरिया पर सांचो अंजोर हो गइल। एगो वेबसाइट वाला एह किताब के छापे खातिर झगडा कइलें त कई गो वेबसाइट पर इ किताब साभार छपल। एह तरह से इंटरनेट पर छपे वाली इ भोजपुरी के पहिलकी किताब रहे। बाद में भावुक जी के व्यक्तिगत वेबसाइट (www.manojbhawuk.com) पर भी इ सब सामग्री आ गइल। बाकिर भावुक के प्रसिद्धि खाली नेट के चलते नइखे। उनका में फल-फूल बा त जड भी बा आ उहो बहुत गहरा। श्री भावुक भोजपुरी के लगभग सब संस्था विश्व भोजपुरी सम्मेलन ( राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग्रेट ब्रिटेन), अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन (प्रबंध मंत्री), पश्चिम बंग भोजपुरी परिषद, भोजपुरी समाज, पूर्वांचल एकता मंच आ भोजपुरी अकादमी आदि से कवनो ना कवना रुप में जुडल रहल बाडन। आज से 12 साल पहिले भोजपुरी अकादमी जइसन स्तरीय पत्रिका में भावुक के लमहर शोध पत्र ‘ भोजपुरी नाटक के संसार’ छप चुकल बा, सम्मेलन पत्रिका समेत भोजपुरी के तमाम पत्र-पत्रिकन आ राष्ट्रीय स्तर के अखबारन में भावुक भोजपुरी के कालम लिख चुकल बाडन। अउर सबसे महत्वपूर्ण बात इ कि भावुक विश्व भोजपुरी सम्मेलन जइसन मंच पर संयोजन आ संचालन कर चुकल बाडन आ अब तक दर्जनों राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय मंच पर काव्य-पाठ, आलेख पाठ आ मंच- संचालन आदि के दायित्व निभा चुकल बाडन। – - अउर आज एगो भोजपुरी टी वी चैनल (हमार टी वी) में प्रोग्रामिग हेड बाडन। – - – - अब एकरा बादो केहू इ कहे कि मनोज भावुक के प्रसिद्धि सिर्फ वेबसाइट के चलते बा त ओकरा के गलदोदई ना त अउर का कहल जाई। अभी हाले में दिल्ली के श्रीराम सेन्टर में मैथिली-भोजपुरी अकादमी का ओर से गणतंत्र दिवस कविता-उत्सव के आयोजन भइल, जवना में भावुक जी के सुने के अवसर मिलल। भावुक के पढत त बहुत दिन से रहीं बाकिर सुनलीं पहिला बेर। पूरा के पूरा सभागार सिर्फ एके गो नाम से गूंजत रहे, मनोज भावुक ,मनोज भावुक । भावुक जी सबका दिलोदिमाग पर छा गइनी। एकस्वर में सभकर डिमांड रहे- भावुक, वंस मोर। तब हमरा एहसास भइल कि भावुक जी जेतना बढिया लिखेनी, ओह से कई गुना बढिया पढेनी। अइसन मंच संचालक आ एंकर जवना कार्यक्रम के छू ली, ओकरा हीट होखहीं के बा, अइसन हमार विश्वास बा। www.purvanchalexpress.com गर्वान्वित बा कि मनोज भावुक के नाम भोजपुरी हाल आफ़ फ़ेम में चुनल गइल बा। भावुक के व्यक्तित्व आ कृतित्व से गुजरला पर एगो सुखद एहसास होला। रउरा भी देखी- * भोजपुरी हॉल ऑफ़ फ़ेम ( भोजपुरी रतन ) * 1- पूरा नाम- मनोज कुमार सिंह 2- पोपुलर नाम- मनोज भावुक 3- जन्म स्थान- कौसड़, सिवान,बिहार 4- जन्म दिन- 2 जनवरी 1976 5- परिचय- भोजपुरी कवि, फिल्म समीक्षक 6- रउरा एतना कम उम्र में एतना कुछ लिखले बानी, भोजपुरी सिनेमा के इतिहास, भोजपुरी नाटक के इतिहास,विश्व पटल पर भोजपुरी, इंटरनेट पर भोजपुरी, भोजपुरी गजल-संग्रह, भोजपुरी गीत-संग्रह, कविता-दोहा संग्रह आ नाटक आदि । – - – - जे खाली राउर नाम सुनले बा, उ इहे बुझेला कि भावुक कवनो 50-60 के उमिर के वरिष्ठ साहित्यकार के नाम ह बाकिर रउरा त 30-32 के उम्र में ही इ सब कुछ लिख गइनी । कइसे संभव भइल? विदेश में जहां भी गइलीं भोजपुरी के संस्था बनवलीं आ भोजपुरिये के आयोजन कइलीं। ग्रेट ब्रिटेन में यूके हिन्दी समिति, बी बी सी लंदन आ गीतांजली बहुभाषीय समुदाय बर्मिंघम के कार्यक्रम में भोजपुरिये के प्रतिनिधि के रुप में शिरकत करीं आ आजो भोजपुरिये के चैनल ‘ हमार टी वी ‘ में सेवा दे रहल बानी। – - – त भोजपुरी त हमरा मन-प्रान में बसल बा आ इ अन्तिम सांस ले साथे रही।- – - – बल्कि हम त भगवान से इहे प्रार्थना करब कि उ अगिलो जनम में हमरा के भोजपुरिये भाषी बनावस । 7-भोजपुरी भाषा,भोजपुरी मीडिया आ भोजपुरी साहित्य के वर्तमान हालत पर कुछ कही। 8- भोजपुरी से कब आ कइसे लगाव भइल ? लेखन के शुरुआत कइसे भइल? 9- भोजपुरी बोले आ सीखे के सबसे अच्छा उपाय? 10- अपना बचपन के बारे में कुछ बताईं? घर के आंगन, जवना में बचपन के याद के अक्स उभरेला, ओकरा के याद कइला पर अभियो आंख नम हो जाला। आंगन के सुख हमरा बेटा के सुलभ नइखे। उ त शहर के किराया के दू गो बंद कमरा मे बाडन। आंगन जवना मá घर के सब दरवाजा खुलत रहे आ चाची, दादी, भउजी आ बुआ के महफिल जमत रहे , रात भर कथा-कहानी सुने के मिलत रहे, उ सब लोक कथा – सीत-बसंत, कउआ-हंकनी, खूंटा मे मोर दाल बा, का खाई,का पीहीं, का ले परदेश जाईं, सोरठी-वृजाभार, सारंगा, आल्हा, सती-विहुला आदि के कुछ -कुछ कडी राग-धुन समेत आजो हमरा याद बा – - – धीरे से, चुपके से लाठी आ टार्च लेके भाग के जाके नाच देखे आ विहान भइला ओकरा खातिर गोधन कुटाये आ रसभरल गारी सुने के बाललीला अब त खाली याद बन के रह गइल बा। गरमी के छुट्टी मे बगइचे-बगइचे ढेला आ झटहा चला के आम तूरल, खेत से अलुआ चोरा के जाडा के रात मे कउर (अलाव) मे पका के खाइल आ दियरा मे सबका कोल्हुआरी जा-जाके ऊंख आ महिया खाइल शहर मे त सपने जइसन बा। 11- अपना अब तक के जीवन-सफर के बारे मे कुछ बताई। बाद मे बतौर इंजिनियर पर्ल पेट, मुंबई मे ज्वाइन कइनी आ उहां से अफ्रिका आ लंदन चल गइनी। वर्तमान मे भोजपुरी चैनल हमार टी वी मे बतौर प्रोग्राम प्रोड्यूसर सेवा दे रहल बानी। – त इहे बा हमरा सफर के कहानी जेमे एह जिनिगी के टेढ-मेढ रास्ता पर हम कई बार संभल-संभल के फिसल गइनी त कई बार फिसल-फिसल के संभल गइनी आ जवन खट्टा-मीठा अनुभव भइल उ गजल-गीत-कविता-कहानी – दोहा बन गइल। 12- कुछ लोग भोजपुरी के गंवारू आ पिछडल भाषा बुझेला? 13- राउर फेवरेट फिल्मी गाना? 14- सबसे फेवरेट भोजपुरी शब्द? आ मुहावरा ? 15- सबसे फेवरेट भोजपुरी खाना? 16- कवनो अइसन घटना बताईं जवना के वजह से लाइफ मे टनिग भइल। 17- राउर फ्यूचर प्लान? 18- भोजपुरिया समाज के सफल होखे खातिर का करे के चाहीं? 19- युवा वर्ग खातिर कवनो संदेश? 20- तबो रउरा अपना अंदाज में भोजपुरियन के कुछ मैसेज दीं। आ चलते-चलते – हमरा विश्वास बाटे कि हम एक दिन/ अपना सपना के साकार करबे करब - लाख घेरो घटा आ कुहासा मगर / बनके सूरज कबो त निकलबे करब 21- भोजपुरी हाल आफ़ फ़ेम मे राउर नाम चुनल गइल बा। कइसन लागता? :- कुलदीप श्रीवास्तवा |
|
