मनोज भावुक Manoj Bhawuk

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www.manojbhawuk.com जुलाई 28, 2007

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http://www.manojbhawuk.com

हमरा आवाज में हमार गीत-गजल-कविता सुनीं

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अप्रैल 4, 2007

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मनोज कुमार सिंह  

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साहित्यिक नाम–   मनोज ‘भावुक’  

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 अनुभव – १३ वर्ष (भोजपुरी मीडिया में)

     गीतकार / पटकथा लेखक / संपादक / फिल्म समीक्षक
    एंकर / कुशल मंच संचालक / रंगकर्मी / अभिनेता
    भोजपुरी रिसर्चर / देश विदेश में भोजपुरी का प्रचार प्रसार
    

 

__________________

 

   

e-mail id –   manojsinghbhawuk@yahoo.co.uk

Mobile no- 09936384644

Website- 

www.manojbhawuk.com

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लंदन एवं अफ्रिका में रहते हुए लेखन में सक्रिय  

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भोजपुरी के लिये समर्पित ।  

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जन्म – 02 जनवरी 1976, कौसड़, सिवान, बिहार 

 

नाटक में डिप्लोमा-  

बिहार आर्ट थियेटर(पेरिस,यूनेस्को की प्रांतीय  

इकाई),  

कालिदास रंगालय, पटना द्वारा संचालित नाट्य कला डिप्लोमा के टाँपर ।   

 

प्रकाशित पुस्तक – तस्वीर जिन्दगी के (भोजपुरी गजल-संग्रह) 

 (इस पुस्तक के लिये मनोज भावुक को भारतीय भाषा परिषद सम्मान २००६ से नवाजा गया).

 

 

 

 

 

प्रकाश्य – 

   1. जिनिगी रोज सवाल (कविता-गीत संग्रह)

  

    2.भोजपुरी सिनेमा के विकास-यात्रा  

(मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन, सुजीत कुमार, 

राकेश पाण्डेय, कुणाल सिंह,मोहन जी प्रसाद,  

अशोक चंद जैन एवं रवि किशन सरीखे  

दो दर्जन फिल्मी हस्ती से बात-चीत, इतिहास, 

लगभग 250 भोजपुरी फिल्मों पर विहंगम दृष्टि,  

भोजपुरी सिरियल एवं टेलीफिल्म आदि)।  

3. भोजपुरी नाटक के विकास-यात्रा( शोध-पत्र)।  

4. भउजी के गाँव (कहानी-संग्रह) 

5.बादलों को चीरते हुए (अफ्रिका एवं यूरोप प्रवास की डायरी)  

6.रेत के झील (गजल-संग्रह) 

7.कलाकार [ नाटक]  

 

 

 

 

 

नाट्य-रुपांतर व निर्देशन-

  फूलसुंघी– भोजपुरी का लोकप्रिय व बहुचर्चित उपन्यास  [ उपन्यासकार- आचार्य पाण्डेय कपिल ]  

 

 

 

 

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नाट्य -अभिनय व निर्देशन- 

हाथी के दाँत, मास्टर गनेसी राम, सोना, बिरजू के बिआह, भाई के धन, सरग-नरक ,जंजीर,कलाकार,फूलसुंघी,
बकरा किस्तों का, इस्तिफा,ख्याति,कफन, मोल मुद्रा का, धर्म-संगम,बाबा की सारंगी, हम जीना चाहते हैं व नूरी का कहना है आदि।
 

 

 

 

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अन्य कलात्मक सक्रियता

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित।

 रंगमंच,आकाशवाणी,दूरदर्शन में बतौर अभिनेता, गीतकार, पटकथा लेखक। ‘

पहली भोजपुरी धारावाहिक ‘ साँची पिरितिया’ में अभिनय ।

भोजपुरी धारावाहिक ‘ तहरे से घर बसाएब’ में कथा-पटकथा-संवाद-गीत लेखन।

पटना दूरदर्शन से एंकरिंग।

भरत शर्मा व्यास द्वारा भावुक के चुनिन्दा गजलों का गायन 

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचो से काव्य-पाठ, व्याख्यान एंव भाषण ।

 भारतीय रेडियो, दूरदर्शन और समाचार पत्र के अलावा

BBC LONDON  से भी interview प्रकाशित-प्रसारित-प्रदर्शित ।

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आठवें राष्ट्रीय अधिवेशन में (४,,६ अक्टूबर २००७ ) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मंच संचालन, संयोजन व विषय-प्रवर्तन

 

 

.

सम्बदध्ता-

1. राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व भोजपुरी सम्मेलन (इंग्लैण्ड)

2.संस्थापक, भोजपुरी एसोशिएसन आँफ युगाण्डा (BAU),पूर्वी अफ्रिका

3. मंत्री, मारीशस भोजपुरी सचिवालय

4.पूर्व प्रबंध मंत्री, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पटना

5 . भोजपुरी की लगभग सभी संस्थाओं से जुडाव ।   

6. U.K की एकमात्र हिन्दी पत्रिका पुरवाई और mauritius  की पत्रिका बसंत में भी रचनायें संकलित 

7. भोजपुरी की लगभग डेढ़ दर्जन पत्र पत्रिकाओं भोजपुरी अकादमी पत्रिका, भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका, समकालीन भोजपुरी साहित्य, कविता, पनघट, महाभोजपुर, पाती, खोईंछा, भोजपुरी माटी, पहरुआ, भोजपुरी संसार, भोजपुरी वर्ल्ड, पूर्वांकुर, विभोर, भैरवी, निर्भीक संदेश और द सण्डे इण्डियन (भोजपुरी ) में लेखन. रचनायें  विभिन्न webmagzines में भी |

8. U.K Hindi Samiti के सदस्य 

9. UK Moderator of Global Bhojpuri Group on The Net.

10. अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीच्यूट के रिसर्च बोर्ड आफ एडभाइजरी कमिटी के मानद सदस्य

 

11.Chife Editor, www.bhojpatra.net (An Online Bhojpuri Content Management System)

12.  Editor,     www.littichokha.com    

13. विदेश संपादक, समकालीन भोजपुरी साहित्य 

सम्मान-पुरस्कार

भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता, द्वारा भोजपुरी गजल-संग्रह ‘ तस्वीर जिन्दगी के’ के लिये —– सिनेहस्ती गुलजार और ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी के

हाथों भारतीय भाषा परिषद सम्मान 2006,

 (भोजपुरी साहित्य के लिए पहली बार यह सम्मान ) ।

 

 

 

 

बिहार कलाश्री पुरस्कार परिषद द्वारा रंगमंच के क्षेत्र में विशिष्ट, बहुआयामी और बहुमूल्य योगदान के लिये—-   बिहार कलाश्री पुरस्कार

 

 

 

अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पटना,  द्वारा कविता के लिये — गिरिराज किशोरी कविता पुरस्कार

 

 

 

    बिहार आर्ट थियेटर, कालिदास रंगालय, पटना, द्वारा —बेस्ट एक्टर अवार्ड

 

 

 

 

अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति, मथुरा, द्वारा काव्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिये — कविवर मैथलीशरण गुप्त सम्मान

 

 

 

अखिल विश्व भोजपुरी विकास मंच, जमशेदपुर द्वारा विदेशों में भोजपुरी के प्रचार-प्रसार हेतु — विश्व भोजपुरी गौरव  सम्मान  

 

 

 

वर्ष २००७ में दर्जनों साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा यथा भोजपुरी समाज सेवा समिति, काशी, माँ काली बखोरापुर ट्रस्ट, आरा, एवम् जीवनदीप चैरिटेबल ट्रस्ट, वाराणसी आदि द्वारा सम्मानित / अभिनन्दित.

 

 

 

 

 

अनुभव –  Plant Manager, London, United Kingdom .

             इसके पहले Uganda [East Africa] में Plant Engineer. 

 

 

जनवरी 8, 2007

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Manoj Bhawuk :: भारतीय भाषा परिषद सम्मान
Read Profile of Manoj Bhawuk at the Bottom of this report.

 सिनेहस्ती गुलजार एवं ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी लंदन से आये भोजपुरी कवि मनोज भावुक को सम्मान प्रदान करते हुए ::  Kolkata :15 Sept 2006

 मनोज भावुक को भारतीय भाषा परिषद सम्मान

 

कोलकाता स्थित संस्था भारतीय भाषा परिषद ने भोजपुरी के युवा कवि मनोज भावुक को उनके भोजपुरी ग़ज़ल संग्रह के लिए भारतीय भाषा परिषद सम्मान से नवाज़ा है.

इस ग़ज़ल संग्रह का नाम है- तस्वीर ज़िंदगी के. पहली बार किसी भोजपुरी साहित्य को यह सम्मान मिला है. कोलकाता में हुए युवा महोत्सव के दौरान मनोज भावुक को ये सम्मान दिया गया.

उन्हें सम्मान प्रदान किया ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी और सिने जगत के नामी फ़िल्मकार और गीतकार गुलज़ार ने.

इस कार्यक्रम में वर्ष 2005 के लिए पुरस्कार पाने वाले युवा साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया. ये हैं-  थौड़म नेत्रजीत सिंह (मणिपुरी) और हुलगोल नागपति (कन्नड़).

इस वर्ष यानी वर्ष 2006 के लिए मनोज भावुक के अलावा जिन युवा साहित्यकारों को सम्मानतिक किया गया, वे हैं- हिंदी के लिए यतींद्र मिश्र और  उर्दू के लिए शाहिद अख़्तर

सम्मान

मनोज भावुक की रचनाओं के बारे में टिप्पणी करते हुए भारतीय भाषा परिषद के मंत्री डॉक्टर कुसुम खेमानी ने कहा, “मनोज भावुक सुदूर युगांडा और अब लंदन में रहते हुए भोजपुरी में लिख रहे हैं. उनकी कविताएँ पौधे की तरह लोक जीवन की धरती पर पनपीं हैं और अपना जीवन रस वहीं से प्राप्त कर रही हैं.”

 मनोज भावुक सुदूर युगांडा और अब लंदन में रहते हुए भोजपुरी में लिख रहे हैं. उनकी कविताएँ पौधे की तरह लोक जीवन की धरती पर पनपीं हैं और अपना जीवन रस वहीं से प्राप्त कर रही हैं
 

डॉक्टर कुसुम खेमानी

डॉक्टर खेमानी ने मनोज भावुक की रचनाओं की जम कर तारीफ़ की और कहा कि युवा कवि सामाजिक सरोकारों को भोजपुरी के ठेठ मुहावरों में मुखरित करते हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा परिषद मनोज भावुक को सम्मानित करते हुए गौरवान्वित है.

इस मौक़े पर युवा कवि मनोज भावुक ने कहा, “दरअसल यह भोजपुरी भाषा और साहित्य का सम्मान है. साथ ही यह उन करोड़ों भोजपुरी भाषियों का भी सम्मान है. जो देश-विदेश में रहते हुए भी भोजपुरी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं.”

( This report is for General public received through Email  :: Courtsey BBC.com )   

Manoj Singh Bhawuk :: An Introduction


Manoj Singh Bhawuk
is shining star on the horizon of Bhojpuri literature and is very popular among young generation for his romantic poetry, his scintillating acting prowess and his untiring strive towards creativity. He can always be noticed deeply involved and devoted towards development of Bhojpuri literature, cinema, Theatre either through personal interactions or through internet.Born in 1976 in Siwan district of Bihar, Bhawuk got associated with Bihar Art Theatre, Patna during his student days and also participated there in All India Radio & Doordarshan, Tv programmes. He was instrumental in the making of many Bhojpuri tele-serials like “Tahre se ghar basaib” where he wrote the whole story, script & dialogues and lyrics & in “Zinagi ke rah” he provided the lyrics.
Apart from writing, he also got involved in acting and was awarded “The Best Actor Award” in his acting diploma course and received “Bihar Kalashree Award” for his special contribution in field of acting.

The remarkable things done by Bhawuk and which is a milestone in the history of world of Bhojpuri Arts and Theatres is his commendable article on the scope and future Bhojpuri drama “Bhojpuri Natak ke Sansar” This article is still making waves in many Bhojpuri magazines. Bhawuk is consistently contributing since then to many world famous Bhojpuri Magazines active in field of theatres and drama such as “Vibhor” and “Bhojpuri Academy Magazine”.

The most commendable work for which Bhawuk needs to be awarded or honoured is his detailed essay and writings on “History of Bhojpuri Cinema “ https://bhojpuricinema.wordpress.com and his untiring effort of popularising Bhojpuri in India and abroad. It is worth mentioning here that it is Bhawuk who has played a significant role in revival and resurgence of Bhojpuri Cinemas in the current decade through his various presentations, writings and participation in the meetings and get together of Bhojpuri film producers. He has been constantly interacting with film personalities like Bhojpuri film producers, Ashok Chand Jain, Mohanji Prasad, Sujit kumar, Rakesh Pandey, Kunal Singh and Ravikishan etc and made them aware of the “Great Potential of Bhojpuri Cinema” long ago and much before the current boom of Bhojpuri Films.

The current research work of Bhawuk “Bhojpuri Cinema ke Vikas Yatra”  www.bhojpurifilm.wordpress.com is story of Journey of Bhojpuri Film. It contains inside story and whole gamut of film making of more than 250 Bhojpuri films, dozens of teleserials and telefilms. This is a rare work and is simply superb and unparallel in the history of Bhojpuri writing. This stupendous work of Bhawuk is a treasure and his wok will always be lighthouse for all of us who want to know the history of Bhojpuri film making.

Very recently on 15th Sept 2006 Bhawuk was honoured by Bharatiya Bhasha Parishad, Kolkata  (see top report) for his literary work, a collection of Bhojpuri gazal “Tasveer Zindagi ke”  http://www.bhojpuri.org/gazal.htm and for his contributions in development of Bhojpuri Literature and Indian Literature as well.

Manoj Bhawuk is an engineer by profession and before his current posting at London, he worked in Uganda as plant engineer. He has been very active at both the places and has been constantly organising and participating in Bhojpuri recitations. He is one of the key members in popularising Bhojpuri Language on the net and is working is UK Moderator of Global Bhojpuri Group on the net. He has also been appointed as Chief Editor of BhojPATRADevnagri – A Bhojpuri Web Magazine and a not for profit initiative launched by Bhojpuri Sansar – A Global group of Bhojpuri Professionals.

May God bless Manoj Bhawuk for all his literary works and his selfless dedication towards Bhojpuri Literature, Art and Theartres.

– A Bhojpuri Sansar Article : Dec -2006

 

अक्टूबर 6, 2006

Filed under: Uncategorized — manojbhawuk @ 11:39 पूर्वाह्न

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लंदन के भोजपुरी कवि- मनोज भावुक
                                                प्रस्तुति- शशि सिंह, मुम्बई
        भोजपुरी के  युवा पीढ़ी  में मनोज भावुक एगो चर्चित नाम बा। भोजपुरी साहित्य, सिनेमा,रंगमंच ,भोजपुरी इंटरनेट  आ देश-विदेश मे भोजपुरी के प्रचार-प्रसार ……..  कहीं भी नज़र डालीं, मनोज भावुक कवनो ना कवनो रूप मे सक्रिय आ सार्थक प्रयास करत मिलिहें। पटना प्रवास के दौरान ( सन ई0 – 1993-2000) बिहार आर्ट थियेटर ,कालिदास रंगालय से जुड़ के भोजपुरी नाटकन के मंचन के अइसन अभियान चलवलें कि उहाँ भोजपुरी नाट्य महोत्सव होखे लागल । बाद मे रेडिओ आ दूरदर्शन से   जुड़लें। दूरदर्शन के पहिला भोजपुरी धारावाहिक ‘साँची पिरितिया’ मे अभिनय के बाद ऊ पटना के फिल्मकार आ निर्माता लोग के भोजपुरी धारावाहिक आ टेलीफिल्म बनावे खातिर कुरेदल शुरु कइलें। ओह घरी कइ गो भोजपुरी सिरियल बनल ,जवना मे ‘तहरे से घर बसाएब ‘ के कथा,पटकथा,संवाद आ गीत लेखन मनोज भावुक के रहे।  ‘जिनिगी के राह’ खातिर भी उ गीत लिखले । लेखन के साथ-साथ उ अभिनय से भी जुड़लें । बिहार आर्ट थियेटर के द्विवर्षीय नाट्य कला डिप्लोमा के टापर ( TOPPER) भावुक के रंगमंच के क्षेत्र मे उनका विशिष्ट योगदान खातिर ‘ बिहार कलाश्री पुरस्कार ‘ आ ‘ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार ‘ से सम्मानित कइल गइल ।   पटना प्रवास के दौरान ही भावुक अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन से जुड़ले  आ बाद मे सम्मेलन के प्रबन्ध मंत्री नियुक्त भइलें। साहित्यिक लेखन के शुरुआत भइल कविता आ गीत से । बाद मे कहानी, भोजपुरी नाटक आ फिल्म के इतिहास लेखन के ओर उन्मुख हो गइलें। भोजपुरी नाटक के इतिहास पर उनकर सारगर्भित लेख ‘भोजपुरी नाटक के संसार ‘ भोजपुरी अकादमी पत्रिका ,पटना जइसन स्तरीय पत्रिका मे प्रकाशित बा। विश्व भोजपुरी रंगमंच के पत्रिका ‘विभोर’ के हरेक अंक मे भावुक के रंगमंचीय लेख  पढ़ल जा सकेला। कवनो-कवनो अंक मे त उनकर तीन-तीन गो लेख बा।

 भावुक जवन सबसे महत्वपूर्ण आ ऐतिहासिक काम कइले बाड़न , जवना खातिर उनका के सम्मानित करे के चाहीं , उ बा- ‘ भोजपुरी सिनेमा के इतिहास लेखन आ देश-विदेश मे भोजपुरी के प्रचार-प्रसार  ।’

    जवना घरी भोजपुरी सिनेमा के बाज़ार लगभग उड़स गइल रहे ,भावुक भोजपुरी सिनेमा मे व्यापक संभावना व्यक्त कइलें। 14 जनवरी 2001,पटना के आई.आई.वी.एम सभागार मे ‘गंगा किनारे मोरा गाँव’ आ ‘धरती मइया’ के निर्माता अशोक चन्द जैन के अध्यक्षता मे भावुक ‘ भोजपुरी सिनेमा के संभावना ‘ पर सारगर्भित आलेख-पाठ कइलन। ई पहिला अवसर रहे जब फिल्मकार आ सहित्यकार लोग कवनो कार्यक्रम मे एक साथे शिरकत कइले रहे लोग।   ………… मुम्बई अइला के बाद ( वर्ष 2002) भावुक सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ,सुजीत कुमार, राकेश पान्डेय, कुणाल सिंह , निर्माता मोहन जी प्रसाद, अभिनेता रवि किसन सरीखे दर्जनो स्टार लोग से भेंट – मुलाकात आ भोजपुरी सिनेमा के सन्दर्भ मे बात-चीत कइलें, जवन भोजपुरी के स्तरीय पत्र-पत्रिकन मे प्रकाशित भइल ।  आज भोजपुरी सिनेमा के बाज़ार गरम बा त एह सिनेमा पर लिखे वाला लोग आ एकरा से जुड़े वाला लोग मुसरी के लेड़ी लेखा बिया गइल बा।जेकरा भोजपुरी से कवनो नाता-गोता नइखे उहो भोजपुरिये क्षेत्र मे आपन बहिनउरा बतावता। भावुक के पैनी नज़र त ओह समय से भोजपुरी फिल्म के संभावना पर प्रकाश डालत आ रहल बा,जवना समय मे भोजपुरी सिनेमा बनल लगभग बन्द हो गइल रहे आ भोजपुरी के बड़े-बड़े महारथी लोग भी कहे कि अब भोजपुरी सिनेमा के कवनो भविष्य नइखे लउकत। आज भावुक के शोध-पुस्तक ‘ भोजपुरी सिनेमा के विकास-यात्रा’ मे लगभग 250 भोजपुरी फिल्म , दर्जनो सिरियल आ टेलीफिल्म के लेखा-जोखा बा। गीत-संगीत ,कथा-पटकथा,अभिनय-तकनीकी के परख-पड़ताल बा। ई आसान काम नइखे। दुर्लभ सामग्री के जुटावल , स्टार लोग से मिलल आ बात-चीत कइल, ….. आ फेर सब के समीक्षा-विवेचना कइल । उहो ओह आदमी खातिर जेकरा रोज़ी-रोटी के स्रोत कुछ और बा। मनोज भावुक पेशा से इंजिनियर बाड़न। वर्तमान मे इंग्लैण्ड के एगो मिनरल वाटर के कम्पनी मे प्लांट मैनेजर बाड़न। एकरा पहिले युगाण्डा के एगो नामी कम्पनी मे प्लांट इंजिनियर रहलें। अपना अतिव्यस्त दिनचर्या के बावजूद भावुक एतना श्रमसाध्य आ समयसाध्य ऐतिहासिक काम के अंजाम देले बाड़न , एह खातिर उनका के रेखांकित,उल्लेखित आ  सम्मानित करे के चाहीं।     भावुक के दूसरा महत्वपूर्ण आ ऐतिहासिक काम बा- देश-विदेश मे भोजपुरी के प्रचार-प्रसार । पूर्वी अफ्रिका के युगाण्डा जइसन देश जहाँ कि भोजपुरियन के संख्या ‘ना’ के बराबर बा। भावुक कोना-कोना, गली-कूचा से भोजपुरियन के खोज-खोज के उहाँ भोजपुरी एसोसिएशन  आफ युगाण्डा के स्थापना क देलन (21 August 2005)। पहिला बार 2005 में युगाण्डा में ‘पुआ पकाल, ठेकुआ बनल आ छठ-पूजा भइल। दीयरी जरल आ भोजपुरिया एक-दोसरा के गला मिलले ।              भावुक युगाण्डा से लंदन( यू.के.) आ गइले ।इहाँ भी 20 August 2006  के हाइड पार्क, लंदन मे भोजपुरियन के एगो गेट-टूगेदर भइल आ पहिला बार भोजपुरिया एगो छत के नीचे इकठ्ठा भइले आ एक-दोसरा से मिलले । भावुक के लंदन अइला मात्र सात-आठ महिना भइल होई , लेकिन उनका सक्रियता आ लोकप्रियता के आलम ई बा कि लंदन से लेके बर्मिंघम तक शायदे कवनो अइसन साहित्यिक- सांस्क्रृतिक कार्यक्रम होई जवना मे भावुक के सादर आमंत्रित ना कइल जात होई। लंदन आ बर्मिंघम के कवि-गोष्ठियन मे भावुक भोजपुरी के तरफ से शिरकत करेलें आ उहाँ भोजपुरी कवि के रूप मे उनकर सशक्त पहचान बन चुकल बा। इंग्लैण्ड के एकमात्र हिन्दी पत्रिका ‘ पुरवाई’ मे भावुक के भोजपुरी रचनन के चाव से छापल जाला। वेबदुनिया आ अभिव्यक्ति-अनुभुति जइसन नामी वेबमैगजीन मे भावुक के भोजपुरी रचनन के हिन्दी अनुवाद छपेला।

हाल ही मे भारतीय भाषा परिषद से सम्मानित होके भावुक जब कोलकाता से लंदन वापस गइलन त BBC,LONDON उनका के सादर आमंत्रित कइलस। भोजपुरी साहित्य आ सिनेमा पर BBC भावुक से बातचीत  (Interview) कइलस। ओह साक्षात्कार मे BBC के माध्यम से भावुक भारत सरकार से ई निहोरा कइले कि अब जेतना जल्दी हो सके भोजपुरी के आठवीं अनुसुची मे शामिल कर लिहल जाय।

भावुक के बचपन रेणुकूट,उत्तर प्रदेश मे बीतल बा। बाबूजी श्री रामदेव सिंह (मजदूर नेता)  हिण्डालको कंपनी मे रहनी। स्कूलिंग के दौरान हिण्डालको मैनेजमेंट भावुक के भाषण आ वाद-विवाद प्रतियोगिता मे भाग लेबे खातिर पिलानी, सारनाथ, दिल्ली, आगरा आदि कई जगे भेजलस । ओही समय से भावुक के लिखे के चस्का लागल – सबसे पहिले यात्रा-संस्मरण । आजकल भावुक अफ्रिका आ यूरोप के यात्रा-संस्मरण – ‘ बादलों को चीरते हुए ‘ लिख रहल बाड़न ।

भावुक छोटे उमिर मे बहुत काम कइले बाड़न । भोजपुरी सिनेमा के इतिहास ( शोध-पत्र), भोजपुरी नाटक के इतिहास ( शोध-पत्र), भउजी के गाँव ( कहानी-संग्रह), आ रेत के झील ( गजल-संग्रह) इनका अप्रकाशित किताबन के नाम ह।

जिनिगी रोज़ सवाल ( कविता,दोहा,गीत- संग्रह) प्रेस मे बा।

भावुक कई गो पत्र-पत्रिकन के सहयोगी संपादक आ विदेशी चेहरा बाड़न।भोजपुरी के इंटरनेटी दुनिया मे मनोज भावुक एगो मशहूर नाम बा।भोजपुरी के पहिला online webmagzine ( www.bhojpatra.net) के प्रधान संपादक बाड़न भावुक । भावुक के व्यक्तित्व आ कृतित्व पर कइ गो समाचार पत्र मे आलेख छप चुकल बा।

एही साल 7,8,9 अप्रैल 2006, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के सातवाँ अधिवेशन ठाणे, मुंबई मे संपन्न भइल । ओह अधिवेशन मे श्री मनोज भावुक के विश्व भोजपुरी सम्मेलन के इंग्लैण्ड इकाई ( ग्रेट ब्रिटेन इकाई)के  राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कइल गइल । सुने मे आवता कि विश्व भोजपुरी सम्मेलन अब एह युवा कवि के अपना पत्रिका ‘समकालीन भोजपुरी साहित्य’ के विदेशी संपादक  बनावे जा रहल बा।    

मनोज भावुक भोजपुरी के लगभग सब पत्र-पत्रिकन के एगो अनिवार्य लेखक त बड़ले बाड़न ,हिन्दी के भी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकन मे इनका भोजपुरी रचनन के स्वागत होला। इनका भोजपुरी गजल-संग्रह ‘तस्वीर ज़िन्दगी के’ के बारे मे का कहे के बा, जब ओकरा ऊपर भारतीय भाषा परिषद जइसन   राष्ट्रीय  स्तर के साहित्यिक संस्था के मुहर लाग गइल बा। ( एही किताब खातिर श्री भावुक के भारतीय भाषा परिषद सम्मान मिलल) । एह से एतना त स्पष्ट बा कि भावुक के भोजपुरी गजलन के गूंज ना सिर्फ व्यापक भोजपुरी जगत मे बा बल्कि हिन्दी जगत मे भी इनका संग्रह के पढ़ल ,गुनल आ सराहल जा रहल बा, जवना के संभावना कविवर माहेश्वर तिवारी जी बहुत पहिलही व्यक्त कइले रहीं।

भारतीय भाषा परिषद श्री भावुक के जवन प्रशस्ति पत्र देहलस ओह मे साफ लिखल बा कि

 ” भारतीय भाषा परिषद श्री मनोज भावुक को न केवल भोजपुरी साहित्य हेतु बल्कि वृहत्तर अर्थ मे पूरे हिन्दी साहित्य और भारत के साहित्य को समृध्द करने हेतु वर्ष 2006 के ‘ युवा पुरस्कार ‘से सम्मानित करते हुए गौरवांवित है। ”

” Bharatiya Bhasha Parishad  feels honoured by recognising Sri Manoj Bhawuk not only for the glorious development of Bhojpuri Literature but also Indian Literature.” 

अब त ई जगजाहिर बा कि 15 सितम्बर 2005 के मनोज भावुक के ई महत्वपूर्ण सम्मान सिनेहस्ती श्री गुलजार आ ठुमरी साम्राज्ञी श्रीमती गिरिजा देवी के हाथे प्रदान कइल गइल ।

भावुक के जनम सीवान जिला के कौसड़ गाँव में 2 जनवरी 1976 के भइल । हाल ही में प्रभात खबर, कोलकाता से बातचीत (18 सितम्बर 2006) में भावुक कहले कि ” पहिले घर मे दीया बार के मन्दिर में दीया जरावे के चाही । ना त घर मे दलिद्दर घुस जाला।” ई कहे के जरुरत ना होखे के चाहीं कि भावुक जवन कहेलें तवन करेलें । भावुक आपन पहिला रचना अपना गाँव के बायोग्राफी ( कौसड़ का दर्पण ) लिखलें। पहिले घर में दीया बरलें आ आज अफ्रिका आ इंग्लैण्ड में रहला के बावजूदों- भोजपुरी,भोजपुरी,भोजपुरी। एकरा के कहल जाला माटी के सपूत आ मातृभाषा से प्रेम । डा0 रमाशंकर श्रीवास्तव जी ठीके कहले बानी ” विदेश में रहि के भी भावुक दू चीज आज तकले ना भूल पवलें ।आपन माई आ भोजपुरी ।” 

भोजपुरी-हिन्दी हास्य-व्यंग्य के महान साहित्यकार  डा0 रमाशंकर श्रीवास्तव जी  भावुक के रचना कर्म पर टिप्पणी करत कहले बानी ”मनोज भावुक   बेहतर इंसान के खोजे मे आपन समय-श्रम लगवले बाड़े । कमे उमिर मे काम बड़के कइले बाड़े। बचपन के खेल मे हम कवनो साथी के मुँह से सुनले

रहनी- ‘छोटकी लुत्ती छटकल जाव,संउसे बनारस लूटत जाव ।’  ‘भावुक’ छोटे उमिर मे लुत्ती बनके साहित्य जगत के बनारस लूट लेले बाड़े। एकरा से साबित होत बा कि प्रतिभा के चमके के कवनो उमिर ना होला।”( पूर्वाकुर ,अप्रैल-जून 2006) ।

ठीक इहे बात गुलजार साहब भावुक के सम्मान देहला के बाद कहनी – ”प्रतिभा की कोई उम्र नही होती” , जवन ओह दिन (15 सितम्बर2006) कोलकाता के अधिकांश अखबार के हेडलाइन बनल।  manch-par-sri-guljar-aur-srimati-girija-devi-ke-sath-manoj-bhawuk.JPG

दोसरा दिने 16 सितम्बर 2006, श्री गुलजार के अध्यक्षता मे हिन्दी कवियन के साथ भावुक के भोजपुरी काव्य-पाठ भइल। भावुक सभागार मे छा गइलें आ पूरा वातावरण भोजपुरीमय हो गइल। ई हम ना 17 सितम्बर के भोरे-भोरे कोलकाता के अखबार बोललस । गुलजार जी मुक्त कंठ से भावुक के प्रशंसा कइनी।

भोजपुरी के एह युवा कवि के हमार बधाई आ शुभकामना ।

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